मेरे इस ब्लॉग को आप मेरे कविता संग्रह के रूप में देखिये | मैं चाहता हूँ कि यदि कोई मेरी कविताएँ पढना चाहे तो उसे मेरी अधिकतर कविताएँ एक ही स्थान पर पढने को मिल जाएँ | आज के दौर में जब कि जल्दी-जल्दी कविता संग्रह का प्रकाशन संभव नहीं है, एक ऐसे प्रयास के ज़रिये अपने पाठकों तक पहुँचने की ये मेरी विनम्र कोशिश है | आप कविताओं के सदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया से मुझे अवश्य अवगत कराएँगे | मुझे प्रतीक्षा रहेगी | कविताओं के साथ प्रयुक्त सभी पेंटिंग्स अजामिल की हैं |
Wednesday, 24 September 2014
प्यार में जुआ
तुम मेरी इन
दो उँगलियों में से
किसी एक को
छुओ अभी तय हो
जाएगा क़ि तुम मुझे प्यार
करते हो या नहीं...?
मैंने डरते-डरते उसकी एक ऊँगली छू ली... अब उसकी
आँखों में आसूं थे... वह प्यार के
जुए में जीत गयी थी
... शायद...
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