मेरे इस ब्लॉग को आप मेरे कविता संग्रह के रूप में देखिये | मैं चाहता हूँ कि यदि कोई मेरी कविताएँ पढना चाहे तो उसे मेरी अधिकतर कविताएँ एक ही स्थान पर पढने को मिल जाएँ | आज के दौर में जब कि जल्दी-जल्दी कविता संग्रह का प्रकाशन संभव नहीं है, एक ऐसे प्रयास के ज़रिये अपने पाठकों तक पहुँचने की ये मेरी विनम्र कोशिश है | आप कविताओं के सदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया से मुझे अवश्य अवगत कराएँगे | मुझे प्रतीक्षा रहेगी | कविताओं के साथ प्रयुक्त सभी पेंटिंग्स अजामिल की हैं |

Thursday, 25 September 2014

आग को बचाना है













कविता में कविता बनकर
बिखर रही है कविता...
खनखना रही हैं चूड़ियाँ...
कोई अँगड़ाई ले रहा है
कोई करवट बदल रहा है
यादों के बिस्तर पर सलवटें
चुगली कर रही हैं
कोई ध्यान से सुन रहा है
उसकी खिलखिलाहट...
उसने दियासलाई की डिब्बी में
समेट लिया है खुद को
वह आग बन गई है...


आग को बचाना है ......

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